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भारत-चीन संबंधों में तीसरे पक्ष के लिए कोई जगह नहीं
विदेश मंत्री एस. जयशंकर
Jul 19 2025

भारत-चीन संबंधों में तीसरे पक्ष के लिए कोई जगह नहीं

विदेश मंत्री एस. जयशंकर को चीन को साफ संदेश

नई दिल्ली : भारत और चीन के बीच रिश्तों में गरमाहट बढ़ रही है। यही वजह है कि हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन का दौरा किया, जहां उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और विदेश मंत्री वांग यी से हुई। इस दौरान जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी से दो टूक कहा कि भारत और चीन के रिश्तों में किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं है। उनका इशारा पाकिस्तान की तरफ था। जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि LAC पर जो कुछ भी हुआ, उसके बाद अब भारत और चीन को अपने रिश्ते खुद ही सुधारने होंगे।

2020 में LAC पर पूर्वी लद्दाख के पास दोनों देशों के जवानों में झड़प हुई थी। हालांकि, अब भारत और चीन के रिश्ते बदल रहे हैं। इस बदलाव में किसी तीसरे देश का कोई मतलब नहीं है। जयशंकर ने अपनी बात रखते हुए एक तरह से रूस को भी बड़ा संदेश दे दिया, जो दोनों देशों के बीच सुलह में हाथ आजमाने की कोशिश में थे।

जयशंकर का चीन दौरा क्यों रहा अहम
विदेश मंत्री जयशंकर ने खुशी जताई कि भारतीय सेना ने देपसांग और डेमचोक इलाके में फिर से गश्त शुरू कर दी है। भारत और चीन के बीच अक्टूबर 2024 में एक समझौता हुआ था। उसके बाद यह गश्त शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के रिश्तों के लिए बहुत जरूरी है। दोनों देशों की सेनाओं को अब तनाव कम करने पर ध्यान देना चाहिए। पूर्वी लद्दाख में घुसपैठ और गलवान घाटी में हुई झड़प को पांच साल हो चुके हैं। अभी भी दोनों देशों के लगभग 50,000 सैनिक, टैंक और भारी हथियार LAC पर तैनात हैं। LAC पूर्वी लद्दाख में 1,597 किलोमीटर लंबी है।

भारत-चीन में किन मुद्दों पर हुई बात
जयशंकर ने वांग यी को यह भी बताया कि चीन को भारत के लिए सप्लाई चेन को ठीक रखना चाहिए। चीन को भारत के लिए जरूरी चीजों के निर्यात पर रोक नहीं लगानी चाहिए। हाल ही में चीन ने कुछ खास खनिजों के निर्यात पर रोक लगा दी थी। ये खनिज ऑटो इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले मैग्नेट और पोटेशियम-नाइट्रोजन उर्वरक बनाने में काम आते हैं।

'चीन-भारत रिश्तों में तीसरे देश की एंट्री मंजूर नहीं'
खबरों के अनुसार, 14 जुलाई को हुई जयशंकर और वांग यी के बीच बातचीत अच्छी रही। जयशंकर ने कहा कि किसी तीसरे देश को भारत और चीन के रिश्तों को तय नहीं करने देना चाहिए। यह बात इसलिए जरूरी है क्योंकि चीन पाकिस्तान को 81 फीसदी सैन्य सामान सप्लाई करता है। इस सामान में मिसाइलें और विमान भी शामिल हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह सब कुछ दिखाया गया था।

आतंकवाद पर भारत की खरी-खरी
अगर जयशंकर और वांग यी की मुलाकात का मकसद भारत और चीन के रिश्तों को सुधारना था। वहीं आतंकवाद का मुद्दा SCO विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर ने प्रमुखता से उठाया। यह बैठक 13 जुलाई को हुई थी। उन्होंने कहा कि SCO को आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से लड़ने के लिए बनाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी शिविरों पर जो कार्रवाई की, वह UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 16050 के अनुसार थी। यह प्रस्ताव 25 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पास किया गया था।

भारत ने रूस को दे दिया सीधा मैसेज
इस प्रस्ताव को UN सुरक्षा परिषद ने एकमत से मंजूरी दी थी। इसमें पाकिस्तान, चीन और रूस भी शामिल थे। यह प्रस्ताव देशों को आतंकवादियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और आतंकवाद के समर्थकों को जिम्मेदार ठहराने और उन्हें न्याय के कटघरे में लाने का अधिकार देता है। इसी प्रस्ताव में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की गई और आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरा बताया गया।

पड़ोसी देशों के साथ अपने रिश्ते खुद संभालेगा भारत- जयशंकर
जयशंकर ने चीन को साफ-साफ बता दिया कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ अपने रिश्ते खुद ही संभालेगा। किसी और को इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पर शांति बनाए रखना और व्यापार को ठीक रखना दोनों देशों के लिए जरूरी है। आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने चीन को याद दिलाया कि UN ने भी आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।

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