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बेंगलुरु में मिला दुनिया का सबसे अनोखा ब्लड ग्रुप!
नया ब्लड ग्रुप CRIB
Aug 03 2025

बेंगलुरु में मिला दुनिया का सबसे अनोखा ब्लड ग्रुप!

नया ब्लड ग्रुप CRIB, जो दुनिया में किसी के पास नहीं है

बेंगलुरु : दक्षिण भारत के कोलार जिले (बेंगलुरु) से एक चौंकाने वाला सामने आया है, जहां 38 साल की एक महिला की बॉडी में रेयर ब्ल्ड ग्रुप पाया गया है. आमतौर पर एबी-नेगेटिव ब्ल्ड ग्रुप को सबसे रेयर माना जाता है. लेकिन अब नया अनोखा ब्लड ग्रुप सामने आया है जिसके बारे में इससे पहले कभी सुना तक नहीं गया था. पहली बार वो भी भारत की एक साउथ इंडियन महिला में रेयर ब्लड ग्रुप मिला है, जिसके बारे में जानने के बाद दुनियाभर के वैज्ञानिक शॉक्ड है..

दुनिया में RH null ब्लड ग्रुप को गोल्डन ब्लड माना जाता है, क्योंकि दुनिया गिने चुने करीब 50 लोग के पास ही इस ग्रुप का खून है। कर्नाटक के कोलार में 38 साल की महिला में एक ऐसा ब्लड ग्रुप मिला है, जो किसी दूसरे शख्स के पास नहीं है। 10 महीने तक जांच के बाद इस दुर्लभ ब्लड ग्रुप को CRIB का नाम दिया गया। इस खोज को जून 2025 में मिलान इटली में इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन (ISBT) के 35वें रीजनल कांग्रेस में सार्वजनिक किया गया। नए एंटीजन CRIB की खोज को रिसर्च की दुनिया में बड़ी सफलता मानी जा रही है, जो ब्लड ट्रांसफ्यूजन और ऑर्गन ट्रांसप्लांट को सुरक्षित बनाने में मदद करेगी।

हार्ट सर्जरी के दौरान मिला गोल्डन ब्लड
इस नए ब्लड ग्रुप की खोज उस समय हुई, जब कोलार जिले के श्रीनिवासपुर तालुक की रहने वाली एक 38 वर्षीय महिला को हार्ट सर्जरी के लिए खून की जरूरत पड़ी। उसे आर एल जलप्पा नारायणा हार्ट सेंटर में भर्ती कराया गया था। उनका ब्लड सामान्य ओ-पॉजिटिव यूनिट से मैच नहीं हो रहा था। फिर उसके ब्लड सैंपल को रोटरी बेंगलोर टीटीके ब्लड सेंटर और बाद में यूके में इंटरनेशनल ब्लड ग्रुप रेफरेंस लेबोरेटरी (IBGRL) भेजा गया।

महिला की सर्जरी बिना ट्रांसफ्यूजन के सफल रही
रोटरी सेंटर के डॉ. अंकित माथुर ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि महिला का ब्लड 'पैनरिएक्टिव' है। यह सभी उपलब्ध सैंपल के साथ रिएक्ट कर रहा था। फिर जांच टीम ने महिला के परिवार के 20 सदस्यों के ब्लड की जांच की। यह ब्लड ग्रुप फैमिली में भी किसी से मैच नहीं हुआ। खास बात यह है कि महिला की सर्जरी बिना ट्रांसफ्यूजन के सफल रही। मगर उनके ब्लड सैंपल को आगे की जांच के लिए यूके के ब्रिस्टल स्थित IBGRL भेजा गया। दस महीने के रिसर्च और मॉलिक्यूलर टेस्टिंग के बाद इंटरनेशनल एक्सपर्टस ने क्रोमर (CR) ब्लड ग्रुप सिस्टम में एक नया एंटीजन पाया।

ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में मील का पत्थर
इस ब्लड ग्रुप को आधिकारिक तौर पर CRIB का नाम दिया गया। इसके नाम में CR का मतलब क्रोमर, I का मतलब इंडिया और B से बेंगलोर। यह खोज ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में एक मील का पत्थर है. साथ ही, भारत को दुर्लभ ब्लड ग्रुप रिसर्च के क्षेत्र में ग्लोबल मैप पर रखता है।

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