सेना के लिए बेहद अहम साबित होगा स्ट्रैटेजिक रोड: भूटानी पीएम ने किया उद्घाटन
नई दिल्ली: भारत ने भूटान में एक अहम सड़क का निर्माण किया है जो डोकलाम के पास है। इस सड़क से रणनीतिक रूप से अहम भूटान की हा वैली तक हर मौसम में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो सकेगी। भूटान की हा वैली डोकलाम से करीब 21 किलोमीटर की ही दूरी पर है।
भूटान में इस सड़क का निर्माण बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने करीब 254 करोड़ रुपये की लागत से किया है। इस सड़क का 1 अगस्त को भूटान के प्रधानमंत्री ल्योनचेन दशो त्शेरिंग उद्घाटन करेंगे। यह सड़क सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं बल्कि मिलिट्री मिलिट्री मूवमेंट के लिए अहम रहेगी।
क्यों है यह अहम
यह सड़क वेस्टर्न भूटान की तरफ चुंबी वैली की तरफ जाती है। तिब्बत ऑटोनोमस रीजन में चुंबी वैली अहम है क्योंकि यहां चीन के सैनिकों के मौजूदगी है। यह सड़क चुंबी वैली बॉर्डर तक पहुंचने के लिए भूटानी आर्मी के लिए अहम होगी। जब कभी भूटान आर्मी को जरूरत हुई तो इस सड़क के चलते सैनिकों की मूवमेंट तेजी से हो सकेगी।
साथ ही यह इस इलाके में लॉजिस्टिक सप्लाई के लिए बेहद कारगर होगी। यह सड़क भूटान की जरूरत थी हालांकि इस ओवरऑल इस रोड से भारत को भी फायदा होगा। भूटान मजबूत होगा तो भारत के लिए चीन को काउंटर करना भी आसान होगा क्योंकि भारत और भूटान के पुराने और अच्छे संबंध हैं।
डोकलाम है खास
2017 में चीन ने डोकलाम के जामफेरी रिज तक जाने के लिए सड़क बनाने की कोशिश की थी जिससे गाड़ियां सीधे जामफेरी रिज तक पहुंचें। सड़क बनाने की कोशिश का भारतीय सेना ने विरोध किया। भारतीय सेना ने ऑपरेशन जूनिपर चलाया भारतीय सैनिक डोकलाम एरिया पहुंचे और सैनिकों ने ह्यूमन चेन बनाकर चीनी सैनिकों को रोड का काम करने से रोका। 72 दिन तक चले गतिरोध के बाद चीनी सैनिकों को वापस जाने को मजबूर होना पड़ा।
हालांकि बाद में चीनी सेना ने डोकलाम में कई इंफ्रास्ट्रक्चर और हेलिपैड बनाए और वहां करीब 600 सैनिकों की स्थाई तौर पर तैनाती की। डोकलाम भूटान की एरिया में आता है लेकिन यह सिक्किम-भूटान और तिब्बत का ट्राई जंक्शन है। जामफेरी रिज की अहमियत यह है कि जामफेरी रिज पर जो पहले पहुंचेगा वह दूसरे पर पूरी तरह हावी हो सकता है।
अगर चीनी सैनिक जामफेरी रिज तक पहुंच जाते हैं तो उन्हें वहां से भारतीय सेना के डोकला पोस्ट पहुंचने में देर नहीं लगेगी। जामफेरी रिज से सीधे सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर नजर रखी जा सकती है। भारत का सिलिगुड़ी कोरिडोर सामरिक रूप से बेहद अहम है । इसे चिकन नेक भी कहते हैं। यह बहुत संकरा रास्ता है जिससे पूरा नॉर्थ ईस्ट देश के बाकी हिस्से से जुड़ता है।