इजरायल का भारतीय कंपनी एल्बिट के साथ समझौता
तेल अवीव/नई दिल्ली : भारत की एक डिफेंस कंपनी ने प्रिसाइस एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम (PULS) मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर (MRL) का स्थानीय स्तर पर निर्माण करने के लिए इजरायली कंपनी एल्बिट सिस्टम्स के साथ साझेदारी की है। निबे डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड, जो भारत की एक निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनी है, उसने इजरायली कंपनी के प्रिसाइस एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम (PULS) मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर (MRL) को भारत में बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर का भारत में ही निर्माण किया जाएगा, जिसका मुकाबला पिनाका रॉकेट सिस्टम से होगा, जिसने अजरबैजान के खिलाफ आर्मेनिया की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया था। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को 28 जुलाई को दी गई एक फाइलिंग में, डिफेंस कंपनी निबे ने समझौते के बारे में जानकारी दी है और कहा है कि MRL को स्थानीय स्तर पर विकसित किया जाएगा।
मंजूरी मिलने पर भारतीय सेना को इसकी आपूर्ति की जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते में ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी शामिल है और इसे 'मेक इन इंडिया' प्रोग्राम के तहत बनाया जाएगा। इससे भारत में लोकल मैन्यूफैक्चरिंग में तेज इजाफा होगा और भारत को तोपखाने प्रणालियों के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।
इसके भारतीय वैरिएंट का नाम 'सूर्या' रखा गया है। इस डिफेंस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत ये होगी कि ये मिसाइल और रॉकेट, दोनों को एक ही प्लेटफॉर्म से फायर कर सकता है। ये एक अत्यधिक एडवांस सिस्टम है, जिसकी मार करने की क्षमता 300 किलोमीटर तक होगी और इसकी सबसे बड़ी खासियत सटीक हमला करने की होगी, जैसा हमला भारत ने पाकिस्तान में और इजरायल ने ईरान में किए थे।
भारत अभी करता है पिनाका रॉकेट का इस्तेमाल
भारतीय सेना फिलहाल पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्च सिस्टम (MBRLS) को ऑपरेट करती है, जिसे DRDO और इंडियन डिफेंस इंडस्ट्री ने मिलकर डेवलप किया है। यह सिस्टम 1999 के करगिल युद्ध में पहली बार इस्तेमाल किया गया था और उसके बाद इसे कई बार डेवलप किया गया है। Pinaka Mk-1 की रेंज लगभग 37.5 किमी है, जबकि Mk-2 और ER वैरिएंट का रेंज 60–90 किमी के बीच है। यह सिस्टम सिर्फ एक मिनट में 12 रॉकेट फायर कर सकता है। इसके अलावा पिनाका रॉकेट सिस्टम की खासियत यह है कि इसे भारत के अलग अलग हिस्सों, जैसे पहाड़ी इलाके, रेगिस्तानी इलाके और मैदानी इलाकों, सभी जगहों पर तैनात किया जा सकता है।