स्मोकिंग और पैसिव स्मोकिंग में क्या फर्क है?
आपका स्वास्थ : एक्सपर्ट्स के मुताबिक, महिलाएं और बच्चे पैसिव स्मोकिंग के सबसे बड़े शिकार होते हैं, क्योंकि अक्सर घरों में पुरुष सदस्य धूम्रपान करते हैं और महिला-बच्चे वेंटिलेशन की कमी वाले वातावरण में लंबे समय तक धुआं झेलते हैं.
फेफड़ों के कैंसर को अक्सर धूम्रपान करने वालों की बीमारी समझा जाता है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं बड़ी है. रिसर्च बताती हैं कि पैसिव स्मोकिंग यानी दूसरों के धुएं में सांस लेना भी उतना ही खतरनाक हो सकता है. वर्ल्ड लंग कैंसर डे पर एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर आप सिगरेट नहीं भी पीते, लेकिन किसी स्मोकर के पास नियमित रहते हैं, तो आपके फेफड़े खतरे में हैं. “एक अनुमान के मुताबिक, पैसिव स्मोकिंग से हर साल दुनियाभर में करीब 6 लाख लोगों की जान जाती है. भारत में यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है.”
पैसिव स्मोकिंग क्या है?
जब कोई व्यक्ति खुद सिगरेट न पीकर, किसी और द्वारा छोड़े गए धुएं को सांस के जरिए अंदर लेता है, तो उसे पैसिव स्मोकिंग कहते हैं. इसमें दो तरह का धुआं शामिल होता है, सिगरेट के जलने से निकलने वाला और स्मोकर के मुंह से छोड़ा गया धुआं. यह धुआं नॉन-स्मोकर्स के फेफड़ों में जाकर धीरे-धीरे टिशू डैमेज करता है.
डॉ. मनचंदा के अनुसार, हमारे यहां बहुत से मरीज ऐसे आते हैं जिन्होंने कभी सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया, लेकिन उनके घर या ऑफिस में कोई स्मोकर रहा है. CT स्कैन में उनके फेफड़ों में वही नुकसान दिखता है जो एक नियमित स्मोकर में होता है.”
बच्चों और महिलाओं पर ज्यादा असर
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, महिलाएं और बच्चे पैसिव स्मोकिंग के सबसे बड़े शिकार होते हैं, क्योंकि अक्सर घरों में पुरुष सदस्य धूम्रपान करते हैं और महिला-बच्चे वेंटिलेशन की कमी वाले वातावरण में लंबे समय तक धुआं झेलते हैं.
पैसिव स्मोकिंग कैसे रोकें?
- 1. पैसिव स्मोकिंग से बचने के लिए सबसे पहले आपको उन लोगों से दूरी बनानी चाहिए जो स्मोकिंग करते हैं। या फिर जब लोग स्मोकिंग करें तो आप उनके साथ न जाएं।
- 2. अगर आपका कोई करीबी स्मोकिंग करता है तो उसे भी इसके नुकसानों के बारे में जागरुक करें।
- 3. अगर आपका रूममेट या घर का कोई सदस्य धूम्रपान करता है तो उन्हें घर के बाहर जाकर स्मोकिंग करने के लिए कहें।
- 4. स्मोकिंग जोन से दूरी बनाएं और ऐसी जगहों पर घूमने जाएं जो स्मोकिंग फ्री होती हैं। इसके अलावा आप मास्क पहनकर भी पैसिव स्मोकिंग से बच सकते हैं।
- 5. लंग्स को हेल्दी रखने के लिए रोजाना योग और प्राणायाम का अभ्यास करें। इससे आपको फायदा मिलेगा।
स्मोकिंग और पैसिव स्मोकिंग दोनों ही फेफड़ों की सेहत के लिए गंभीर खतरा हैं. जागरूकता, कड़े कानून और जिम्मेदार व्यवहार ही हमें इस धीमे जहर से बचा सकते हैं. क्योंकि लंग कैंसर सिर्फ स्मोकर की नहीं, बल्कि आसपास रहने वाले हर व्यक्ति की कहानी बन सकता है.
(यह प्रकाशन केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है, अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें)