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144 मिसाइलों से लैस भारत का विध्वंसक
Aug 06 2025

144 मिसाइलों से लैस भारत का विध्वंसक

विशाल मिसाइल लोड के साथ पूरे क्षेत्र में एक रणनीतिक संतुलन भी बनाएगा प्रोजेक्ट 18 !

नई दिल्ली : इंडियन नेवी लगातर अपनी ताकत में इजाफा कर रही है. जो भारत की हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समंदर के भीतर कई गुना ताकत बढ़ा देगी. दरअसल, नौसेना एक बेहद जरूरी प्रोजेक्ट के तहत, अत्याधुनिक P-18 स्टील्थ विध्वंसक बनाया जा रहा है. इस विध्वंसक की सबसे बड़ी खासियत इसकी असाधारण मारक क्षमता होगी, क्योंकि इसे कुल 144 मिसाइल सेल से लैस किया जाएगा. यह विध्वंसक सिर्फ एक जहाज नहीं, बल्कि पानी में तैरता हुआ एक 'किला' होगा, जो दुश्मन के हर हमले का निर्णायक जवाब देगा.

इस विध्वंसक का सबसे बड़ा हथियार इसका 144 मिसाइल सेल यानी वर्टिकल लॉन्च सिस्टम है. ये मिसाइल सेल एक साथ कई तरह की मिसाइलों को लॉन्च करने की क्षमता रखते हैं, जिससे यह दुश्मन के लिए एक बड़ा खतरा बन जाता है.

इन सेलों में ब्रह्मोस (एक्सटेंडेड-रेंज) जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें होंगी, जिनकी मारक क्षमता 500 से 600 किलोमीटर तक हो सकती है. इसके अलावा, यह लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली बराक-8 मिसाइल से भी लैस होगा, जिसकी रेंज 100 से 150 किलोमीटर तक है. भविष्य में इसमें हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-II जैसी मिसाइलें भी तैनात की जा सकती हैं, जिनकी रेंज 1000 किलोमीटर से भी ज्यादा होगी.

500 किमी तक के लक्ष्यों पर रखेगा नजर
इतना ही नहीं, यह विध्वंसक एक अत्याधुनिक फेज्ड-एरे रडार से लैस होगा, जो 500 किलोमीटर तक की दूरी तक हवाई और समुद्री लक्ष्यों पर नजर रख सकता है. यह रडार एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करने और उन पर हमला करने की क्षमता रखता है, जिससे यह नौसेना की निगरानी शक्ति को कई गुना बढ़ा देगा.

स्टील्थ टेक्नोलॉजी से होगा लैस
बता दें, यह एक 'स्टेल्थ' विध्वंसक है, जिसका मतलब है कि इसका डिजाइन ऐसा है कि यह दुश्मन के रडार पर बहुत मुश्किल से पकड़ में आएगा. इसकी यह खासियत इसे युद्ध के मैदान में एक बड़ी रणनीतिक बढ़त देगी, जिससे यह बिना पता चले दुश्मन के करीब पहुंचकर हमला कर सकता है.

वहीं, 13,500 से 15,000 टन के विशाल आकार वाला यह विध्वंसक सिर्फ मिसाइल ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक रडार सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं से भी लैस होगा. इसकी मदद से हेलीकॉप्टर भी ले जा सकते हैं, जिससे इसकी निगरानी और हमलावर क्षमता और भी बढ़ जाएगी. साथ ही, यह अपने बड़े आकार के कारण यह लंबे समय तक गहरे समुद्र में ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है, जो हिंद-प्रशांत जैसे विशाल समुद्री क्षेत्र में बेहद जरूरी होते हैं.

 

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