Breaking News
CJI ने वरिष्ठ वकीलों पर लगा दी पाबंदी; बोले- सभी के लिये नोटिस निकालें
Aug 07 2025

CJI ने वरिष्ठ वकीलों पर लगा दी पाबंदी; बोले- सभी के लिये नोटिस निकालें

अब Court No.1 में सीनियर वकील नहीं कर सकेंगे केस का मौखिक ज़िक्र!

नई दिल्ली : भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अब एक नया नियम लागू होने जा रहा है, जिसके तहत वरिष्ठ अधिवक्ताओं को कोर्ट नंबर 1 में किसी भी मामले का मौखिक उल्लेख यानी दोषी ठहराने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सीजेआई गवई ने यह पाबंदी तब लगाई, जब वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी आज एक मामले का मौखिक उल्लेख करने के लिए उनकी अदालत में खड़े हुए थे। कोर्टरूम में सिंघवी के खड़ा होते और मामले का उल्लेख करने की मांग करते ही सीजेआई ने कहा कि जूनियर्स को भी मौका दिया जाना चाहिए।

इसके बाद मुख्य न्यायाधीश गवई ने कोर्ट मास्टर को इस संबंध में एक नोटिस जारी करने का भी निर्देश दिया। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस गवई ने कहा, "नोटिस निकाल देना… अब से किसी भी वरिष्ठ वकील को मामले का मौखिक उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सोमवार से किसी भी नामित वरिष्ठ वकील को मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जूनियर वकीलों को ऐसा करने का अवसर दिया जाना चाहिए।"

अगले सोमवार से होगा नियम प्रभावी
सीजेआई ने कहा कि वह इस नियम को अगले सोमवार से प्रभावी कर रहे हैं, ताकि सभी को तब तक इसकी सूचना मिल सके। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "वरिष्ठ अधिवक्ताओं से बहुत बड़ी मांग है कि किसी भी मामले का उल्लेख अब वरिष्ठ अधिवक्ताओं द्वारा नहीं किया जाए।"

दरअसल, जब सिंघवी कोर्ट नंबर 1 यानी सीजेआई की अदालत में किसी मामले का मौखिक उल्लेख करने के लिए उठे, तो सीजेआई गवई ने उनसे कहा, "एक बड़ी मांग है, हमें वरिष्ठ वकीलों द्वारा मौखिक उल्लेख करना बंद करना चाहिए।" इस पर सिंघवी ने कहा, "मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार हूं, अगर इसे समान रूप से लागू किया जाता है।"

इस पर CJI ने कहा, “हम इसे लागू करेंगे। किसी भी वरिष्ठ वकील को उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी। जूनियर को मौका देना चाहिए। सोमवार से, कोर्ट नंबर 1 में, किसी भी वरिष्ठ वकील को मामलों का
उल्लेख करने की अनुमति नहीं होगी। कोई नामित वरिष्ठ वकील नहीं। सोमवार से हम इसका पालन करेंगे। ताकि किसी को अचरज न हो।”

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, उसी दौरान सिंघवी ने सुझाव दिया, "इसे सभी अदालतों में एक समान लागू किया जा सकता है।" इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह इसे केवल अपनी पीठ में ही लागू कर सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "कम से कम कोर्ट नंबर 1 में तो इसकी अनुमति नहीं होगी। जूनियर्स को अवसर मिलने चाहिए।"

अन्य प्रमुख खबरे

उत्तर प्रदेश

Electro Homeo News

National Federation of electro Homeopathic organization's New Delhi Council of electro Homeopathic system of Medicine
read more ...

© Electrohomeonews. All Rights Reserved. Designed by Electro Homeo News Team