40,000 से अधिक ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनी, उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही
लखनऊ (आनन्द कुमार की रिपोर्ट) : योगी सरकार में प्रदेश के गांवों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की मुहिम ने बड़ा असर दिखाया है। बीसी सखी योजना के माध्यम से गांव-गांव तक बैंकिंग सेवाएं पहुंच रहीं हैं और 40 हजार से ज्यादा महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहीं हैं।
प्रदेश में पहली बार योगी सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण बैंकिंग को इतनी रफ्तार मिली है। बीसी सखियां गांवों में बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में काम करते हुए खातों में पैसे जमा-निकासी, आधार आधारित लेनदेन और सरकारी योजनाओं का भुगतान जैसी सेवाएं लोगों तक पहुंचा रहीं हैं। इससे ग्रामीणों को बैंक जाने की परेशानी कम हुई है और महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार का रास्ता भी खुला है।
ग्रामीणों को बैंक की कतारों से मिली मुक्ति
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत शुरू हुई इस योजना ने गांवों में बैंकिंग सेवाओं की रफ्तार को कई गुना बढ़ा दिया है। अब ग्रामीणों को अपने खाते से पैसे निकालने, जमा करने या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। बीसी सखियां आधार आधारित लेनदेन के जरिए घर बैठे ही लोगों की मदद कर रही हैं। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी बढ़ा है।
कई महिलाएं कमा रहीं 40 से 50 हजार
यह योजना केवल बैंकिंग सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए बम्पर कमाई का जरिया भी बन गई है। लेनदेन पर मिलने वाले कमीशन ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। राज्य में कई ऐसी बीसी सखियां हैं जो अपनी मेहनत के दम पर महीने का 40 से 50 हजार रुपये तक कमीशन कमा रही हैं। अब तक कुल 120 करोड़ रुपये का कमीशन सखियों के खातों में पहुंच चुका है, जिससे उनके परिवारों के जीवन स्तर में बड़ा सुधार आया है।
प्रयागराज लेनदेन में नंबर-1, बरेली और शाहजहांपुर भी आगे
वित्तीय लेनदेन के मामले में जिलों की बात करें तो **प्रयागराज** पूरे प्रदेश में पहले पायदान पर है। यहां 1030 बीसी सखियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इस सूची में **बरेली** दूसरे स्थान पर (890 सखियां) और **शाहजहांपुर** तीसरे स्थान पर (813 सखियां) है। ये आंकड़े बताते हैं कि इन जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बैंकिंग को लेकर काफी उत्साह है।
50 हजार करोड़ के लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम
आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर अब तक एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़ा जा चुका है। वहीं, संयुक्त मिशन निदेशक जनमेजय शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में अब तक 50,225 महिलाओं को बीसी सखी के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से करीब 40 हजार महिलाएं फिलहाल मैदान में सक्रिय हैं।
सखियों का अगला लक्ष्य जल्द ही 50 हजार करोड़ रुपये के लेनदेन के आंकड़े को पार करना है। महिलाओं की यह उद्यमिता न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रही है।