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चैत्र नवरात्रि के साथ शुरू हुआ हिंदू नववर्ष!
चैत्र नवरात्रि
Mar 20 2026

चैत्र नवरात्रि के साथ शुरू हुआ हिंदू नववर्ष!

वाराणसी : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ 19 मार्च 2026 से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत हो गई है। इस बार का संवत्सर कई मायनों में खास है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस साल 12 नहीं, बल्कि 13 महीने होंगे। ज्येष्ठ माह में अधिकमास लगने के कारण साल में 12 के बजाए 13 महीने पड़ेंगे। बता दें कि ऐसा अधिक मास की वजह से होता है। जानिए इस साल को क्यों कहा जा रहा 'रौद्र संवत्सर', क्या होता है इसका मतलब और क्यों माना जा रहा ये यह साल खास।

चैत्र नवरात्रि से ही क्यों शुरू होता है नया साल
हिंदू पंचांग में साल की शुरुआत चैत्र महीने से मानी जाती है। खास तौर पर शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नया संवत्सर शुरू होता है। यही वजह है कि चैत्र नवरात्रि का पहला दिन ही हिंदू नववर्ष का पहला दिन होता है। इस समय मौसम भी बदलता है, पेड़ों पर नई पत्तियां आती हैं, यानी प्रकृति भी जैसे नई शुरुआत करती है, इसीलिए इसे शुभ माना गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इस साल 13 महीने क्यों पड़ रहे हैं? दरअसल, हिंदू कैलेंडर चंद्रमा की चाल पर चलता है, जबकि हमारा सामान्य साल सूरज के हिसाब से होता है। इन दोनों के बीच थोड़ा अंतर आ जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हर कुछ साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे अधिक मास कहते हैं। इसी वजह से इस साल 12 की जगह 13 महीने हो रहे हैं।

अधिक मास का धार्मिक महत्व क्या है
अधिक मास को बेहद पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान लोग ज्यादा पूजा-पाठ, दान और भक्ति में समय बिताते हैं। हालांकि इस महीने में शादी-ब्याह जैसे मांगलिक काम नहीं किए जाते। इसे एक तरह से खुद को सुधारने और भगवान के करीब जाने का समय माना जाता है।

हर हिंदू साल का एक नाम होता है और इस बार का नाम ‘रौद्र संवत्सर’ है। नाम सुनकर थोड़ा सख्त लग सकता है, लेकिन इसका मतलब सिर्फ नकारात्मक नहीं होता। इसे बदलाव, ऊर्जा और नई चुनौतियों का संकेत माना जाता है। यानी यह साल हमें मजबूत बनने और हालात के अनुसार खुद को ढालने की सीख देता है।

13 महीने होने की वजह से यह साल थोड़ा अलग अनुभव देगा। धार्मिक दृष्टि से भी यह समय ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाएगा, क्योंकि अधिक मास में पूजा-पाठ का महत्व बढ़ जाता है। साथ ही यह साल हमें धैर्य रखने, सोच-समझकर फैसले लेने और जीवन में संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है। यह हिंदू नववर्ष सिर्फ तारीख बदलने भर का मौका नहीं है, बल्कि खुद को बेहतर बनाने और नई शुरुआत करने का सही समय भी है।

 

 

 

 

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