कुछ को मिलेगा मौका, किसी की होगी छुट्टी, कुछ का बदलेगा विभाग
नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मोदी सरकार 3.0 के पहले बड़े 'मिड-टर्म रीसेट' यानी केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल की तैयारियां अंतिम चरण में मानी जा रही हैं। हाल ही में केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद इन अटकलों को और बल मिला है। इस फेरबदल में न केवल कई मंत्रियों के विभाग बदलेंगे, बल्कि खराब परफॉर्मेंस वाले चेहरों की छुट्टी भी हो सकती है, जबकि चुनावी राज्यों के युवा चेहरों को टीम मोदी में एंट्री मिलने की उम्मीद है।
जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले इस पूरी कवायद को अंजाम दिया जा सकता है। यह फेरबदल केवल प्रशासनिक स्तर पर विभागों का बदलाव नहीं होगा, बल्कि इसके जरिए आगामी विधानसभा चुनावों (उत्तर प्रदेश, बिहार) और 2029 के सियासी समीकरणों को साधने की भी कोशिश की जाएगी। मंगलवार यानी 30 जून को मोदी सभी विभागों के सचिवों के साथ भी बैठक करने वाले हैं।
यह बदलाव सरकार के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में भी दिखेगा, जहां पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में 'टीम नितिन नबीन' का भी ऐलान होने जा रहा है। माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा, उन्हें संगठन में एडजस्ट किया जा सकता है। अगले साल यानी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव खासकर उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात को ध्यान में रखते हुए वहां के नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान ज्यादा मिल सकता है। इसके साथ ही जिन मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो चुका है, साथ ही उन्हें दोबारा नहीं चुना गया है, उनकी छुट्टी भी तय मानी जा रही है।
किसकी हो सकती है छुट्टी?
इस फेरबदल में 'परफॉर्मेंस' और 'संगठनात्मक जरूरत' को सबसे बड़ा पैमाना बनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कई बड़े और चौंकाने वाले नाम इस लिस्ट में शामिल हो सकते हैं। कुछ मंत्रालयों से जुड़े हालिया विवादों के बाद मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। विशेष रूप से पेपर लीक मामलों और अन्य प्रशासनिक विसंगतियों के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म है।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष बने पंकज चौधरी और दिल्ली भाजपा की कमान संभालने वाले हर्ष मल्होत्रा जैसे नेताओं को 'एक व्यक्ति-एक पद' के नियम के तहत संगठन में पूरी तरह सक्रिय करने के लिए मंत्री पद से मुक्त किया जा सकता है। हाल ही में जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने और पार्टी द्वारा उन्हें दोबारा न भेजे जाने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। इसी तरह हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा के संदर्भ में भी चर्चाएं तेज हैं।
किसे मिल सकता है मौका?
कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ-साथ युवाओं को तरजीह दी जाएगी। उत्तर प्रदेश और पंजाब के आगामी चुनावों को देखते हुए इन राज्यों से नए सामाजिक समीकरणों को साधने वाले चेहरों को शामिल किया जाएगा। बिहार से मुख्यमंत्री पद छोड़कर केन्द्र में आए नीतीश कुमार को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय है। उन्हें उनकी पसंद का रेल मंत्रालय भी दिया जा सकता है।
पंजाब चुनाव को देखते हुए आप छोड़कर आए राघव चड्ढा और भाजपा नेता चुघ को मंत्री बनाया जा सकता है। टीएमसी और शिवसेना यूबीटी छोड़कर आए नेताओं को भी मौका मिल सकता है। शिवसेना से एकनाथ शिंदे के बेटे एकनाथ शिंदे का नाम प्रमुखता से चल रहा है। इनके साथ ही कुछ महिला चेहरों को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है।
किसका बदलेगा विभाग?
वित्त मंत्रालय और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े भारी-भरकम मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की गई है। चर्चा है कि नितिन गडकरी को कुछ अतिरिक्त या नए महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि कुछ अन्य आर्थिक मंत्रालयों में मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदले जा सकते हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का विभाग बदलकर उन्हें शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। सरकार से संगठन में बदलाव: कुछ कद्दावर मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन (BJP) में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष या महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भेजा जा सकता है, ताकि राज्य स्तर पर पार्टी को मजबूत किया जा सके।
क्या है इस फेरबदल की मुख्य वजह?
सरकार चाहती है कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले नए मंत्री अपने विभागों को संभाल लें ताकि विपक्ष के हमलों का मजबूती से जवाब दिया जा सके। बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम की घोषणा भी इसी के साथ होनी है, जिससे सरकार और संगठन में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके। कहा जा रहा है कि विभिन्न राज्यों के आगामी चुनावों में किसी भी प्रकार के असंतोष को थामने के लिए जमीनी पकड़ रखने वाले नेताओं को आगे लाने की योजना है।
दिल्ली के सियासी गलियारों में बैठकों का दौर जारी है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जेपी नड्डा और नितिन नबीन के साथ अंतिम दौर की चर्चा पूरी हो चुकी है और जल्द ही नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण की तारीख सामने आ सकती है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के अगले विदेश दौरे से पहले नए मंत्री शपथ ले सकते हैं।