राज्य सरकार, एलडीए और बिजली विभाग को फटकार
लखनऊ : इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने हाल ही में राजधानी के अलीगंज इलाके में एक इमारत में लगी भीषण आग में 15 लोगों के मारे जाने के मामले में बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और राज्य विद्युत निगम से जवाब मांगा। इसके अलावा अदालत ने अधिकारियों को भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने शिवेंदु पांडेय द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया। मामले की अगली सुनवाई चार अगस्त को होगी।
लखनऊ के अलीगंज इलाके में गत 22 जून को तीन मंजिल की एक इमारत में आग लग गई थी, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गयी थी। इस घटना के बाद इमारतों में सुरक्षा के उपायों, आपातकालीन प्रतिक्रिया और भवन सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर चिंताएं पैदा हुई थीं।
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में घटना की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय द्वारा गठित एक समिति द्वारा जांच की निगरानी कराने के आदेश देने का अनुरोध किया था।
घटना के पीड़ितों को मुआवजा देने में भी अलग-अलग पैमाने तय करने पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई है साथ ही मुआवजे के निर्धारण के लिए समान पैमाना तय करने पर जोर दिया। कोर्ट ने मामले के पक्षकारों से जवाब तलब किया कि उन्होंने अब तक क्या किया। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
स्थानीय अधिवक्ता शिवेंदु पांडेय ने यह जनहित याचिका दायर की है। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार, उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा महानिदेशक, लखनऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी, लखनऊ के नगर आयुक्त, एलडीए के उपाध्यक्ष, लखनऊ के जिला अधिकारी और पांच अन्य प्राधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने यह मौखिक आदेश एक स्थानीय अधिवक्ता की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में घटना की स्वतंत्र, समयबद्ध और न्यायालय की निगरानी में जांच समिति के गठन के लिए निर्देश देने के अनुरोध किया गया है।
राज्य सरकार की ओर से सीएससी शैलेंद्र कुमार सिंह ने कोर्ट को बताया कि मामले में राज्य सरकार समुचित कार्यवाही कर रही है। राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही भी सुनवाई के दौरान उपस्थित रहे।